UPI Charge Rule : आज के समय में डिजिटल ट्रांजेक्शन बहुत तेजी के साथ बढ़ा हैं। जब भी हमें कोई सामान खरीदना होता है या ऑनलाइन ऑर्डर करना होता है तो हम यूपीआई ट्रांजैक्शन के जरिए ही पेमेंट करते हैं। पेमेंट छोटा हो या बड़ा आजकल सभी पेमेंट यूपीआई या फिर डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए ही करते हैं। ऐसे में सरकार की तरफ से यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगा दिया गया है, लिमिट सेट कर दिए गए हैं। सरकार की तरफ से यह पुष्टि कर दिया गया है कि UPI Transaction पर Charge लिया जाएगा।
ऐसे में सवाल यह आता है कि किन यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज देना पड़ेगा। इसके साथी क्या फ्री होगा? इन लोगों को चार्ज देना पड़ेगा? कितना रुपए के ट्रांजैक्शन पर कितना चार्ज लगेगा? सभी सवालों का जवाब विस्तार से।
UPI Transaction Charge : यूपीआई ट्रांजैक्शन पर देना होगा शुल्क।
सरकार की तरफ से यह पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी परसनल परसनल यूपीआई पेमेंट पूरी तरह से मुक्त होगा। यानी कि आम लोगों को यूपीआई ट्रांजैक्शन पर किसी भी प्रकार का कोई चार्ज नहीं देना पड़ेगा।
वहीं ज्यादातर छोटे कारोबारी भी सरकार के इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे। लेकिन इसमें से कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू होगा। आईए जानते हैं यूपीआई ट्रांजैक्शन पर क्या नियम बनाया गया है?
पिटूपी पेमेंट क्या होती है? एमडीआर यानी की (मरचेंट डिस्काउंट रेट) क्या होती है? और सरकारी ऐलान में ग्राहक पर किसी भी तरह का न लगाने की बात होने के बावजूद भी यूपीआई यूजर्स में चिंता का विषय क्यों बना हुआ है?
यूपीआई से पैसे भेजने पर क्या देना होगा चार्ज?
आप सभी को बता दे कि अगर कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को यूपीआई से पैसे भेजता है तो कोई चार्ज नहीं लगेगा। स्पष्ट रूप से कहा जाए की अमाउंट चाहिए कितनी भी हो पीटूपी यानी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई भी चार्ज नहीं देना होगा।
सरकार के मुताबिक यूपीआई के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 70% हिस्सा ऐसे ही पीटुपी पेमेंट का है।
UPI Charge Rule : पीटुपी पेमेंट क्या होती है?
सबसे पहले समझते हैं कि पीटुपी पेमेंट क्या होती है? सबसे पहले जानेंगे कि इसका मतलब होता है, एक व्यक्ति कोई दूसरे व्यक्ति को सीधे पैसे भेजना Person to Person (पीटुपी) होता हैं।
उदाहरण के तौर पर आपने किसी करीबी या फिर दोस्त को यूपीआई के जरिए कितनी भी रकम भेजे हो। इस पर किसी भी तरह का कोई चार्ज नहीं लगेगा। सरकार के मुताबिक रकम कितनी भी हो ऐसे यूपीआई पेमेंट बिल्कुल मुक्त होंगे।
₹2000 तक की पेमेंट पर क्या मर्चेंट को देना होगा चार्ज।
आप सभी को बता दे की₹2000 तक के सभी Person-to-Marchant) यानी व्यक्ति से मर्चेंट को किए जाने वाले यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर नहीं लगेगा। यानी ग्राहक को तो कोई चार्ज देना नहीं पड़ेगा। मर्चेंट को भी ₹2000 तक की यूपीआई पेमेंट पर कोई भी चार्ज नहीं देना होगा।
पीटुपी पेमेंट ट्रांजैक्शन क्या होती है।
जब आप किसी दुकानदार या फिर कारोबारी को यूपीआई से पैसे देते हैं, तो ऐसे में पीटुपी यानि कि Person to Marchant पेमेंट पीटुपी कहा जाता है।
जैसे किराने की दुकान पर पेमेंट। पेट्रोल पंप पर पेमेंट या फिर किसी भी दुकान से यूपीआई के जरिए सामान खरीदना। इसमें आप सिर्फ व्यक्ति हैं और सामने वाला कारोबारी मर्चेंट है।
₹2000 के ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर क्या चार्ज देना होगा।
आप सभी को बता दे कि ऐसे पेमेंट पर मरचेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगेगा। ₹2000 से ज्यादा के सामान्य मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 फ़ीसदी एमडीआर सरकार की तरफ से तय किया गया है।
लेकिन यह शुल्क ग्राहक को नहीं देना होगा साथ ही सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि मर्चेंट इस शुल्क का बोझ ग्राहक पर नहीं डालें।
एमडीआर क्या होता है और इसे कौन देगा?
सबसे पहले आप सभी को आसान भाषा में समझना होगा कि एमडीआर क्या है? बता दे की एमडीआर यानी कि मरचेंट डिस्काउंट रेट या डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाला मर्चेंट से जुड़ा हुआ शुल्क है।
जैसे मान लीजिए की किसी नियम के तहत किसी मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% एमडीआर है और ग्राहक ने ₹10000 का यूपीआई पेमेंट कर दिया है, तो एमडीआर ₹40 होगा। लेकिन इस मामले में हम बात यह है कि ₹40 ग्राहक को नहीं देना पड़ेगा। सरकार की तरफ से साफ-साफ कहा गया है कि एमडीआर ग्राहक पर नहीं डाला जाएगा।
यानी कि ग्राहक ₹10000 का सामान खरीदते हैं तो उसे यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए अलग से ₹40 नहीं देने पड़ेंगे। सिर्फ मर्चेंट को ₹40 का शुल्क चुकाना पड़ेगा।
एमडीआर मर्चेंट पेमेंट सिस्टम के भीतर लिया जाने वाला शुल्क है। यह सरकार या एनपीसीआई ( नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया) के तरफ से लगाया गया टैक्स नहीं है। इससे मिलने वाला रकम पेमेंट सिस्टम से जुड़े अलग-अलग हिस्सेदारी जैसे कि बैंक पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और यूपीआई एप प्रोवाइड के बीच बांटा जाएगा। सरकार की तरफ से इसका इस्तेमाल यूपीआई सिस्टम को चलाने और आगे बढ़ाने में किया जाएगा।
कितना पेमेंट पर कितना चार्ज देना पड़ेगा?
आप सभी को बता दे की सरकार की तरफ से एमडीआर के तहत चुकाई जाने वाली फीस को लेकर अधिकतम रकम तय किया गया है। वैसे एमडीआर 0.4 फ़ीसदी तय किया गया है। इस हिसाब से 75000 तक के यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर अधिकतम ₹300 होगा।
और हां यही ₹300 एमडीआर की अधिकतम लिमिट सेट की गई है। यानी कि यूपीआई ट्रांजैक्शन 75000 से अधिक कितना भी हो चार्ज अधिकतम ₹300 ही देना होगा।
भारत के लोग यूपीआई ट्रांजैक्शन चार्ज पर डर क्यों रहे हैं?
आप सभी को बता दे कि भारत में यूपीआई की शुरुआत 10 साल पहले हुई थी और अब तक यह सुविधा मुक्ति मिल रहा था।
सरकार की तरफ से पहली बार बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए एमडीआर की दर बताई गई है। इससे लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि आज अगर एमडीआर मर्चेंट देगा, तो क्या दुकानदार या व्यापारी अपना मुनाफा छोड़कर इसका बोझ ग्राहक पर तो नहीं डालेगा?
तो क्या कारोबारी अपनी लागत निकालने के लिए किसी और तरीके से समान या फिर चीजों पर कीमत बढ़ा सकता है।
उदाहरण के तौर पर समझे कि अगर कोई भी कारोबारी पर डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की लागत बढ़ता है, तो ग्राहक को डर है कि इसे समान या सेवा की कीमत जोड़ सकता है। या फिर पेमेंट कैश में लेने की प्रवृत्ति बढ़ सकता है।
हालांकि पीआईबी प्रेस रिलीज के जरिए सरकार की तरफ से साफ कहा गया है कि ऐसा नहीं होना चाहिए। बैंक को यह सुनिश्चित करने का सलाह दिया गया है कि मर्चेंट एमडीआर का पैसा ग्राहक से न वसूला जाए। यूपीआई एप कंपनी को भी प्लेटफार्म फीस या फिर छिपे हुए चार्ज लगाने से रोका गया है।
क्या छोटे दुकानदार को भी UPI Charge देना होगा?
आप सभी को बता दे की कुछ छोटे मर्चेंट शुल्क चार्ज से बाहर हैं। स्ट्रीट वेंडर, मोहल्ले के दुकान और दूसरे छोटे कारोबारी, जिन्हें पीटुपी कैटेगरी में रखा गया है। अगर यूपीआई कर कोड के जरिए महीने में ₹100000 तक हासिल करते हैं तो उनके ट्रांजैक्शन पर जीरो एमडीआर चार्ज रहेगा।
सरकार की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि इससे छोटे कारोबारी पर अतिरिक्त डिजिटल पेमेंट लागत नहीं आएगी।